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Showing posts from 2016

जन्मदिन है पावन त्यौहार..💐

जन्मदिन है पावन त्यौहार अभिनन्दन जय गुरु महाराज तुम जहाँ भी हो,पास हो प्रेमियो के प्रेम हो,आशा और उल्लास हो जन्म-जन्म के बंधे हुए ह्रदय नचाये तुमने शान्ति के त्यौहार का तेरे नाम से आगाज़ हो तुमने खोले सारे राज़ अभिनन्दन जय गुरु महाराज सब कुछ तेरा दिया दान है,कहो तुम्हे मैं क्या दूं तन, मन,धन सब प्रेम सहित तुमको अर्पण करदूँ आज है मौका हम साथ में नाचे गायें तुम में मैं,मुझमे तुम बसों,नैनो को दर्पण करदूँ गाजे,बाजे सब मेरे हों पर हो गीत में तेरी आवाज़ अभिनन्दन जय गुरु महाराज क्यों न फिर से एक बार तुम मुरली वही बजाओ हंस हंस कर हम प्रेमियो को नाच नचाओ केक कटे और सबमे बंटे, केक में तेरी मिठास हो फिर भी कुछ"गुरुचरण"भूल गया तो तुम ही याद दिलाओ नहीं मालूम रीति-रिवाज़ अभिनंदन जय गुरु महाराज......💐💐💐

कब आओगे.,कब बुलाओगे...

प्यारे प्रभु,कब आओगे😪😪 कब हमे बुलाओगे😢 ये प्यार चीज़ बुरी है❤ कई उम्मीद जुड़ी हैं🤔 यूँ तो तुम बिन सब बुरा है💔 पर तेरी जुदाई उस से भी बुरी है💘 कब तक तरसाओगे💗 कब आओगे,👣कब बुलाओगे👣👣 मैं तुम्हे,तुम मुझे देख मुस्कुराते हो🙂 नैन ही नैन मे मुझको गले लगाते हो🤗 सत्संग मैंने नही सुना कभी भी हमेशा लगता है मुझसे बतियाते हो😄 हाल-चाल कब सुनाओगे कब आओगे👣,कब हमे बुलाओगे👣👣 तेरा मिलन त्योहारों से कम नही दाता🌟💥✨💫 अब तुमसे मिले बिना नही रहा जाता😪 जैसे तैसे करके कुछ समय काट लिया पर अब तुम बिन कुछ भी नही भाता💔 कितना समय लगाओगे कब तो आओगे✈कब हमे बुलाओगे👣👣 मैं रूठा तो तुम्हे मुझे मनाना पड़ेगा😞 यही देरी से आने का हर्जाना लगेगा😊 सिर्फ इतना ही नही काफी होगा प्यारे मुझे हंसते हुए गले से लगाना पड़ेगा🤗 कहो कब कदम बढाओगे👣 कब आओगे,कब बुलाओगे👣👣 चलो छोड़ो सब,बस एक बात पक्की करलें👍🏻 दोनो बनकर व्यापारी व्यापार करलें🙌 मुझे तुम्हारी ओर तुम्हे मेरी ज़रूरत है🤔 तो क्यों न आपस मे एक सौदा करलें🌙⭐ "गुरुचरण"तुम्हारा ओर तुम मेरे हो जाओगे कब आओगे✈कब हमे बुलाओ...

हृदय द्वार खुले हैं तेरे स्वागत मे....

हृदय द्वारा खुले हैं तेरे स्वागत मे तुम दूर देश से आओगे थोड़ा बहुत थक जाओगे मेरे हृदय कपाट खुले मिलेंगे नैन झुकेंगे तेरी आव-भक्त मे हृदय द्वार खुले हैं तेरे स्वागत मे मेरे लिए क्या लाओगे एक मुस्कान भरा चेहरा काफी ये क्या कम है मुझसे मिलन को तुमने सारी धरती मापी अश्रु बहेंगे तेरी चाहत मे हृदय द्वार खुलें हैं तेरे स्वागत मे मैं सो जाऊं तो ज़गा लेना खाने मे जो कुछ मन हो मुझसे कहकर बनवा लेना नमक डलेगा मेरे नैनो के आंसू का खीर मे मीठा डलेगा,मेरे प्रेम की चाहत से हृदय द्वार खुले हैं तेरे स्वागत मे तुमने सारी धरती बांची है "गुरुचरण" से चरण धुलवा लेना जब सोने जाओ बिस्तर पर मुझे चरणों के पास बैठा लेना तेरे चरणों से सुंदर बिस्तर नही नींद आएगी बड़ी राहत मे हृदय द्वार खुले हैं तेर स्वागत मे हृदय द्वार खुलें है तेरे स्वागत मे....

प्रेम तेरा हो जाऊं

हे प्रेम तेरा हो जाऊं,हे प्रेम तेरा हो जाऊं तुम मुझको अपनाओ,मैं तुमको अपनाऊं तेरे मेरे प्रेम की दाता, डोर बंधे कुछ ऐसी तुम नज़रें फेर के देखो मुझको,मैं जब-जब तुम्हे बुलाऊँ हे प्रेम तेरा हो जाऊं तुम सिंहासन पर बैठकर,बात करो मुझसे हंस-हंस कर मैं बैठ चरण में दाता, पंखी मोर झुलाऊँ हे प्रेम तेरा हो जाऊं तुम बच्चा समझ देखो मुझे,शरारत भरी नजरों से मैं घुटनो बल बैठ श्रद्धा से,आरती थाल घुमाऊं हे प्रेम तेरा हो जाऊं तुम टहलो कभी शाम को,कोठी के सामने बनी रोड पर मैं साथ-साथ टहलूं तेरे,तुम्हे दिल की बात बताऊं हे प्रेम तेरा हो जाऊं अर्ज़ करे"गुरूचरण" स्वीकार करो हे प्रेम प्रिय, काश ऐसा हो जाए दरवाज़ा खुले तुम अंदर आओ,मैं हक्का-बक्का रह जाऊं हे प्रेम तेरा हो जाऊं हे प्रेम तेरा हो जाऊं,हे प्रेम तेरा हो जाऊं तुम मुझको अपनाओ,मैं तुमको अपनाऊं

मेरे प्रेम की डोर..

आपसे मेरे प्रेम की है डोर कुछ ऐसी प्रभु मैं प्यास तुम नीर,दोनों एक दूजे के पूरक प्रभु जब कभी मैं उदास हूँ,तुम मुझे हर्षाते हो भटके हुए इस पुत्र को,राह तुम दिखलाते हो मेरी सीरत मे तेरी कीरत,मेरी सूरत में तेरी सूरत प्रभु हैं भाव सब तुमसे जुड़े,पूर्ण प्रेम के स्वामी हो तुम हृदय सम्राट,भक्ति राह में अंतर्यामी हो तुम घट-घट में हैं झांकी तुम्हारी,तुम कुम्हार मैं मूरत प्रभु "गुरु चरण"कहे शरण में रखना,डोर मत न छोड़ना ह्रदय के सब तारों को अब प्रेम गगन में जोड़ना तुम बिन मेरा वजूद नहीं,पल पल मुझे तेरी जरूरत प्रभु आपसे मेरे प्रेम की है डोर कुछ ऐसी प्रभु मैं प्यास तुम नीर,दोनों एक दूजे के पूरक प्रभु

मेरे अपने सात समन्दर..

रेत में ही घुल जाते हैं मेरे अपने सात समन्दर आकर मुझमे मिल जाते हैं मेरे सात समन्दर बनकर पर्वत सी उठती है फिर पत्ते सी गिर जाती है हवा सी बनकर चलती है,आकर गले लग जाती है तेज़ वेग से चलती है धारा मेरे अंदर आकर मुझमे मिल जाते हैं,मेरे साथ समन्दर...।। खिल खिल कर मुस्काता है,बन जाता मस्त कलन्दर जीत के दस दरवाजों को बनता सम्राट सिकन्दर जीती जिभ्या,आँख,कान,जीता दिल देवेन्द्र आकर मुझमे मिल जाते हैं,मेरे साथ समन्दर...।। दसो दिशाएं देख ली,सुन लिए सात सुरेन्द्र ब्रह्माण्ड पर नज़र फिरा दी,देख लिया जब अंदर ज्योत जगे,शंख बजे,प्रभु सजे,स्वयं हूँ एक मन्दिर आकर मुझमे मिल जाते हैं,मेरे साथ समन्दर...।।

चले आओ...

चले आओ,चले आओ,मुझे बचाने मेरा जीवन फिर से सजाने चले आओ,,,,चले आओ,,, मुझे चाँद तारों के बिच ले चलो ऊँगली मैं थामू तुम्हारी,मुझसे पहले पग तुम धरो मैं हूँ अज्ञानी,अनभिज्ञ,मंदमति चंचल तुम मेरा मार्गदर्शन करो मुझे माया से बचाने ह्रदय से अपनाने चले आओ,,,चले आओ,,,चले आओ मैं पथिक,तुम अंतर्यामी मैं मूढमति,तुम सर्वकला सम्पूर्ण स्वामी भूल के आभार आपका,मैं करता हूँ मनमानी मैं एक तो घोर अज्ञानी,फिर ऊपर से अभिमानी गर्म हवाओ से बचाने,,साथ निभाने चले आओ,,,,चले आओ,,,, मेरा जीवन फिर से सजाने,, चले आओ,,,चले आओ,,,

स्वांस स्वांस मेरा साथ

तेरा सुमिरन करूँ दयानिधि मैं पल पल दिन रात तुम भी यों ही देते रहो स्वांस स्वांस मेरा साथ तुम प्यार भरी गंगा यमुना,सात समुन्दर संग मोती मैं बन पाऊँ तेरी काई,तो बन जाए मेरी बात ना फूल,ना धुप,ना घी ना ज्योति वन्दना करूँ ह्रदय,जोड़े दोनों हाथ बहता बहता दूर भटक गया डूब रहा अब नाले में भेज प्यार की नाव को लेलो संग मे नाथ तेरा सुमिरन करूँ करुणा निधि मैं पल पल दिन रात तुम भी देते रहो स्वांस स्वांस मेरा साथ....

एक और कृपा करदो

तेरी कृपाओं से ही बना हूँ मैं,एक और कृपा करदो मैं हूँ शरण में तेरी,चरणों में मुझको धरलो कोई बराबर ना मेरे,गर चरणों की धुल बन जाऊं मेरे ह्रदय में यों समाओ,हर तरफ तुम्हे ही पाऊँ राह तुम हो,तुम ही मेरी मंजिल बन जाओ पग पग तेरी झांकी देखूं,जब जब घट में चाहूँ महापापी हूँ तुम पाप भंजन, पाप मेरे हरलो मैं हूँ शरण में तेरी...... कृपाओं के भण्डार सतगुरु,कृपया ही मैं चाहूँ इतनी क्षमता भी देना,कृपाओं का पात्र बन पाऊँ चाहत है की ताउम्र देखूँ तुम्हे पास बैठकर जीवन बहुत छोटा है,कैसे मन को रिझाऊं शरणार्थी हूँ तेरा,लाज मेरी रखलो मैं हूँ शरण में तेरी.... अब कुछ तुमने दिया,सदुपयोग सम्भवतः मैंने नहीं किआ गलती मेरी रही हों,इलज़ाम तुम पर धृ दिया सजा पाने आया हूँ पर सजादाता तुम बनो सजा से पहले आखिरी इच्छा को तुम्हे समर्पित कर दिया फूल बनालो एक बार वन्दना की थाली का,फिर चाहे जो सज़ा तय करलो मैं हूँ शरण में तेरी.....

इन्द्रधनुष

हे अंदर के आकाश मुझे एक इंद्रधनुष बना दो धनुष बना दो सात रंग का सात रंग का,सप्तरंग का पहले रंग में होली-होली उसमे रौशनी प्यार की जीवनी मेरे हृदय में जीवंत तेरे किरदार की दूजे रंग में रौला-रब्बा सुनना चाहे हर कोई रब्बा ना दिखे कोई साज बाज बजता सुने एक साज सुंदर सा तीसरे रंग में अमृत फुहारें गिरती लाल गगन से बन्द करदी सब कड़िया अपनी प्यास बूझन दे चोथे रंग में नई जिंदगी समझना अगर चाहो तो सून सतगुरु मार्ग की शुरू करो प्रेम बन्दगी पांचवा रंग वचन का जो सर झुकाकर दिया तुम्हारे कदमो में चाहे इंद्रधनुष अगर कोई उसे लाना तेरे चरणों में छठा रंग है हुकुम तेरा इंद्र धनुष को फलने फूलने दो जब जब मांगे झूले ये ह्रदय इसे झूले में झूलने दो सातवां रंग मेरी विनती है कहो प्रभु तो मैं अर्ज करूँ मैं हाजिरी अपने ह्रदय की हरपल सेवा में दर्ज करूँ.....

सर्वस्व तुम्हे समर्पित है.....

मेरे प्रयासों को प्रेम के पंख देने वाले मेरी सब सफलताएं आपके चरणों में समर्पित है ये तन,ये मन,ये धन मेरा सर्वस्व तुम चरणों में अर्पित है नया जीवन दिया तुमने,नई दिशा दी तुमने मेरे टूटे साहस को फिर से जोड़ा,आशा दी तुमने तेरे प्रेम की चर्चाएं, यदा कदा सर्वदा मेरे हर हृदय कोने में वर्णित है सर्वस्व तुम्हे समर्पित है तुम मुझमे मिलो,मैं लेकर के पिपासा तुममे मिलूं बनकर के दुग्ध पवित्र प्रेम का,दिन रैन तेरे चरणों में निखरुं मैं और तुम जब एक भये,मैं बनकर के हवा तुमसे लिपटूं ये शांति सन्तुष्टि जो पाई मैंने,सब त्व कृपा से अर्जित है सर्वस्व तुम्हे समर्पित है "गुरु चरण"शरण में समर्पण करता आठों पहर हृदय में तुमको धरता हस्त,नयन,हृदय और आंसू का सुंदर सयोंग उस सयोंग से शब्द ये रचित हैं सर्वस्व तुम्हे ही समर्पित है.......