सर्वस्व तुम्हे समर्पित है.....
मेरे प्रयासों को प्रेम के पंख देने वाले
मेरी सब सफलताएं आपके चरणों में समर्पित है
ये तन,ये मन,ये धन मेरा
सर्वस्व तुम चरणों में अर्पित है
नया जीवन दिया तुमने,नई दिशा दी तुमने
मेरे टूटे साहस को फिर से जोड़ा,आशा दी तुमने
तेरे प्रेम की चर्चाएं, यदा कदा सर्वदा
मेरे हर हृदय कोने में वर्णित है
सर्वस्व तुम्हे समर्पित है
तुम मुझमे मिलो,मैं लेकर के पिपासा तुममे मिलूं
बनकर के दुग्ध पवित्र प्रेम का,दिन रैन तेरे चरणों में निखरुं
मैं और तुम जब एक भये,मैं बनकर के हवा तुमसे लिपटूं
ये शांति सन्तुष्टि जो पाई मैंने,सब त्व कृपा से अर्जित है
सर्वस्व तुम्हे समर्पित है
"गुरु चरण"शरण में समर्पण करता
आठों पहर हृदय में तुमको धरता
हस्त,नयन,हृदय और आंसू का सुंदर सयोंग
उस सयोंग से शब्द ये रचित हैं
सर्वस्व तुम्हे ही समर्पित है.......
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