एक और कृपा करदो

तेरी कृपाओं से ही बना हूँ मैं,एक और कृपा करदो
मैं हूँ शरण में तेरी,चरणों में मुझको धरलो

कोई बराबर ना मेरे,गर चरणों की धुल बन जाऊं
मेरे ह्रदय में यों समाओ,हर तरफ तुम्हे ही पाऊँ
राह तुम हो,तुम ही मेरी मंजिल बन जाओ
पग पग तेरी झांकी देखूं,जब जब घट में चाहूँ
महापापी हूँ तुम पाप भंजन, पाप मेरे हरलो
मैं हूँ शरण में तेरी......

कृपाओं के भण्डार सतगुरु,कृपया ही मैं चाहूँ
इतनी क्षमता भी देना,कृपाओं का पात्र बन पाऊँ
चाहत है की ताउम्र देखूँ तुम्हे पास बैठकर
जीवन बहुत छोटा है,कैसे मन को रिझाऊं
शरणार्थी हूँ तेरा,लाज मेरी रखलो
मैं हूँ शरण में तेरी....

अब कुछ तुमने दिया,सदुपयोग सम्भवतः मैंने नहीं किआ
गलती मेरी रही हों,इलज़ाम तुम पर धृ दिया
सजा पाने आया हूँ पर सजादाता तुम बनो
सजा से पहले आखिरी इच्छा को तुम्हे समर्पित कर दिया
फूल बनालो एक बार वन्दना की थाली का,फिर चाहे जो सज़ा तय करलो
मैं हूँ शरण में तेरी.....

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