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सब तेरे आने से है

दिल तेरी याद बिना वीराने से हैं तीज,दीवाली,होली सब तेरे आने से है रूखे हैं सब त्योहार तेरी मौजूदगी बिना होली की रंगत,दीवाली की रौनक संग तेरे मनाने में है अब आ गए हो तो हमे बुला क्यों नही लेते मेरे मुर्शिद इतना भी मज़ा क्या मुझे सताने में है ये त्योहार क्या होता है,मुझे नही खबर वो पल त्योहार से कम नही,जो संग तेरे बिताने में है उड़ती सी अफवाह सुनी है,तुम भी मिलना चाहते हो हो जाओ रूबरू,क्या रखा अफवाह उड़ाने में है प्रेम संग "गुरुचरण" सब त्योहार मिले जो प्रेम तुमसे मीले,वो मिलता कहाँ जमाने में है।