ये फाग-फाग तेरे साथ -साथ मैं खेलूं
ये फाग-फाग तेरे साथ -साथ, हे नाथ-नाथ मैं खेलूं ये रंग-रंग तेरे संग-संग हे नाथ-नाथ मैं खेलूं तुम दूर-दूर से बन सूरज नूर-नूर बरसाओ मैं बन सूरजमुखी तुम्हे दूर-दूर से घूर-घूर के देखूं ये रंग-रंग तेरे संग-संग हे नाथ-नाथ मैं खेलूं तुम हाव-भाव बड़े प्रेम-भाव से चरणों में मुझको लेलो मैं प्रेम-भाव बड़े चाव-चाव से बाँहों में तुमको लेलूं ये रंग-रंग तेरे संग-संग हे नाथ-नाथ मैं खेलूं "गुरू चरण"शरण गहे, हे नाथ-नाथ दे हाथ -हाथ अपनाओ मैं तन-मन-धन कर अर्पण,प्रेम तुमपर उडेलूं ये रंग-रंग तेरे संग-संग हे नाथ-नाथ मैं खेलूं