जब तुम बोलते हो
जब तुम बोलते हो कानो में मिश्री सी घोलते हो महज़ उस हवा के झोंके से मौसम महक सा जाता है जो चूमकर तेरे चरण मेरे चेहरे पर आता है तेरे गले से लगे होने का अहसास तब होता है जब बोलते बोलते तुम बाहें खोलते हो जब तुम बोलते हो कानो में मिश्री सी घोलते हो तेरी मुस्कान मेरे दिल में घर कर जाती है तेरी सूरत मेरे नैनो को बड़ा लुभाती है सोने सी चमक आती है जब मुझे किस्सा कोई सुनाते हो सोने पर सुहागा जब वो किस्सा मुझसे जोड़ते हो जब तुम बोलते हो कानो में मिश्री सी घोलते हो तुम दूर होकर भी पास पास रहते हो बनकर प्यार की गंगा दिलों में बहते हो "गुरुचरण"को तन्हाई में मुस्कुराना सिखाया तुमने संग खाते-पीते, मुस्कुराते हो,संग संग डोलते हो जब तुम बोलते हो कानो में मिश्री सी घोलते हो