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कमी सी है ,,,,

  माना कि यहाँ तेरे आगमन की एक सरगर्मी सी है, पर तेरे लौट आने तक, हर चीज़ में एक कमी सी है। तेरे कदम रखने मात्र से, खिल उठते हैं यहाँ के पेड़-पौधे, बिन तेरे तो आसमान महज़ बादल, और धरती सूखी ज़मीं सी है। चर्चा है तेरे आने की, तो धूप में भी ठंडक का अहसास होने लगा, वरना पत्तों पर जमी है धूल, और साये में भी एक नमी सी है। महज़ तेरे आने से, मेरी हर "ना" अब "हाँ" में बदल जाती है, वरना रूठे मन से तो मेरी "हाँ" में भी "ना" समझनी लाज़मी सी है। मिलन की आस में 'गुरु' ने दोस्तों की महफ़िल सजाई है, इन तैयारियों को देख, तेरे शीघ्र आने की उम्मीद मन में बनी सी है। तेरे लौट आने तक, वाकई... सब कमी सी है। माना कि यहाँ तेरे आने की एक सरगर्मी सी है, पर तेरे लौट आने तक तो सब कमी सी है। “गुरु “