Posts

Showing posts from 2017

सब तेरे आने से है

दिल तेरी याद बिना वीराने से हैं तीज,दीवाली,होली सब तेरे आने से है रूखे हैं सब त्योहार तेरी मौजूदगी बिना होली की रंगत,दीवाली की रौनक संग तेरे मनाने में है अब आ गए हो तो हमे बुला क्यों नही लेते मेरे मुर्शिद इतना भी मज़ा क्या मुझे सताने में है ये त्योहार क्या होता है,मुझे नही खबर वो पल त्योहार से कम नही,जो संग तेरे बिताने में है उड़ती सी अफवाह सुनी है,तुम भी मिलना चाहते हो हो जाओ रूबरू,क्या रखा अफवाह उड़ाने में है प्रेम संग "गुरुचरण" सब त्योहार मिले जो प्रेम तुमसे मीले,वो मिलता कहाँ जमाने में है।

ये फाग-फाग तेरे साथ -साथ मैं खेलूं

ये फाग-फाग तेरे साथ -साथ, हे नाथ-नाथ मैं खेलूं ये रंग-रंग तेरे संग-संग हे नाथ-नाथ मैं खेलूं तुम दूर-दूर से बन सूरज नूर-नूर बरसाओ मैं बन सूरजमुखी तुम्हे दूर-दूर से घूर-घूर के देखूं ये रंग-रंग तेरे संग-संग हे नाथ-नाथ मैं खेलूं तुम हाव-भाव बड़े प्रेम-भाव से चरणों में मुझको लेलो मैं प्रेम-भाव बड़े चाव-चाव से बाँहों में तुमको लेलूं ये रंग-रंग तेरे संग-संग हे नाथ-नाथ मैं खेलूं "गुरू चरण"शरण गहे, हे नाथ-नाथ दे हाथ -हाथ अपनाओ मैं तन-मन-धन कर अर्पण,प्रेम तुमपर उडेलूं ये रंग-रंग तेरे संग-संग हे नाथ-नाथ मैं खेलूं

जब तुम बोलते हो

जब तुम बोलते हो कानो में मिश्री सी घोलते हो महज़ उस हवा के झोंके से मौसम महक सा जाता है जो चूमकर तेरे चरण मेरे चेहरे पर आता है तेरे गले से लगे होने का अहसास तब होता है जब बोलते बोलते तुम बाहें खोलते हो जब तुम बोलते हो कानो में मिश्री सी घोलते हो तेरी मुस्कान मेरे दिल में घर कर जाती है तेरी सूरत मेरे नैनो को बड़ा लुभाती है सोने सी चमक आती है जब मुझे किस्सा कोई सुनाते हो सोने पर सुहागा जब वो किस्सा मुझसे जोड़ते हो जब तुम बोलते हो कानो में मिश्री सी घोलते हो तुम दूर होकर भी पास पास रहते हो बनकर प्यार की गंगा दिलों में बहते हो "गुरुचरण"को तन्हाई में मुस्कुराना सिखाया तुमने संग खाते-पीते, मुस्कुराते हो,संग संग डोलते हो जब तुम बोलते हो कानो में मिश्री सी घोलते हो

मेरा आज भी कमाल है

कल को लेकर कह रहा,दिल से कुछ तेरा लाल है मेरा कल भी था कमाल का,मेरा आज भी कमाल है तेरे संग में क्या दिन गिनु,क्या पल गिनु,क्या साल गिनु महके तेरी महक से बगीचा,क्या फूल गिनु क्या डाल गिनु प्रेम तुम घने बरगद से हो,छाया में हर पथिक निहाल है मेरा कल भी था कमाल का,मेरा आज भी कमाल है तुम्हारे प्रेम ने तो समय के बंधनों को तोड़ा है गया समय तेरे साये में था,आने वाला भी तुमपर छोड़ा है तुम्हारे चरण में भाग्य मेरा,मेरे सर पर तुम्हारा हाथ है मेरा कल भी कमाल था,मेरा आज भी कमाल है इस साल भी तेरा ख्याल रहेगा,आंखो में इंतज़ार रहेगा बरस माह वार का नही पता,बस तुमसे प्यार रहेगा मुद्दे कई बदले भले,मुझको मतलब बस तुमसे हैं ये ह्रदय दिवाना है तेरा,तुमसे ही दो-चार रहेगा हम-तुम साथ तो,किसे परवाह, क्या दिन क्या साल है मेरा कल भी कमाल था,मेरा आज भी कमाल है "गुरु चरण"शरण में रखना सदा प्रेम प्रिय फिर क्या सोलह (16) क्या सताराँ (17) है ये दास कल भी तुम्हारा था ये दास आज भी तुम्हारा है तेरी रज़ा से मैं दूर जाऊं,इतनी कहाँ मज़ाल है मेरा कल भी था कमाल का,मेरा आज भी कमाल है।।।।।।।