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Showing posts from April, 2016

चले आओ...

चले आओ,चले आओ,मुझे बचाने मेरा जीवन फिर से सजाने चले आओ,,,,चले आओ,,, मुझे चाँद तारों के बिच ले चलो ऊँगली मैं थामू तुम्हारी,मुझसे पहले पग तुम धरो मैं हूँ अज्ञानी,अनभिज्ञ,मंदमति चंचल तुम मेरा मार्गदर्शन करो मुझे माया से बचाने ह्रदय से अपनाने चले आओ,,,चले आओ,,,चले आओ मैं पथिक,तुम अंतर्यामी मैं मूढमति,तुम सर्वकला सम्पूर्ण स्वामी भूल के आभार आपका,मैं करता हूँ मनमानी मैं एक तो घोर अज्ञानी,फिर ऊपर से अभिमानी गर्म हवाओ से बचाने,,साथ निभाने चले आओ,,,,चले आओ,,,, मेरा जीवन फिर से सजाने,, चले आओ,,,चले आओ,,,

स्वांस स्वांस मेरा साथ

तेरा सुमिरन करूँ दयानिधि मैं पल पल दिन रात तुम भी यों ही देते रहो स्वांस स्वांस मेरा साथ तुम प्यार भरी गंगा यमुना,सात समुन्दर संग मोती मैं बन पाऊँ तेरी काई,तो बन जाए मेरी बात ना फूल,ना धुप,ना घी ना ज्योति वन्दना करूँ ह्रदय,जोड़े दोनों हाथ बहता बहता दूर भटक गया डूब रहा अब नाले में भेज प्यार की नाव को लेलो संग मे नाथ तेरा सुमिरन करूँ करुणा निधि मैं पल पल दिन रात तुम भी देते रहो स्वांस स्वांस मेरा साथ....

एक और कृपा करदो

तेरी कृपाओं से ही बना हूँ मैं,एक और कृपा करदो मैं हूँ शरण में तेरी,चरणों में मुझको धरलो कोई बराबर ना मेरे,गर चरणों की धुल बन जाऊं मेरे ह्रदय में यों समाओ,हर तरफ तुम्हे ही पाऊँ राह तुम हो,तुम ही मेरी मंजिल बन जाओ पग पग तेरी झांकी देखूं,जब जब घट में चाहूँ महापापी हूँ तुम पाप भंजन, पाप मेरे हरलो मैं हूँ शरण में तेरी...... कृपाओं के भण्डार सतगुरु,कृपया ही मैं चाहूँ इतनी क्षमता भी देना,कृपाओं का पात्र बन पाऊँ चाहत है की ताउम्र देखूँ तुम्हे पास बैठकर जीवन बहुत छोटा है,कैसे मन को रिझाऊं शरणार्थी हूँ तेरा,लाज मेरी रखलो मैं हूँ शरण में तेरी.... अब कुछ तुमने दिया,सदुपयोग सम्भवतः मैंने नहीं किआ गलती मेरी रही हों,इलज़ाम तुम पर धृ दिया सजा पाने आया हूँ पर सजादाता तुम बनो सजा से पहले आखिरी इच्छा को तुम्हे समर्पित कर दिया फूल बनालो एक बार वन्दना की थाली का,फिर चाहे जो सज़ा तय करलो मैं हूँ शरण में तेरी.....

इन्द्रधनुष

हे अंदर के आकाश मुझे एक इंद्रधनुष बना दो धनुष बना दो सात रंग का सात रंग का,सप्तरंग का पहले रंग में होली-होली उसमे रौशनी प्यार की जीवनी मेरे हृदय में जीवंत तेरे किरदार की दूजे रंग में रौला-रब्बा सुनना चाहे हर कोई रब्बा ना दिखे कोई साज बाज बजता सुने एक साज सुंदर सा तीसरे रंग में अमृत फुहारें गिरती लाल गगन से बन्द करदी सब कड़िया अपनी प्यास बूझन दे चोथे रंग में नई जिंदगी समझना अगर चाहो तो सून सतगुरु मार्ग की शुरू करो प्रेम बन्दगी पांचवा रंग वचन का जो सर झुकाकर दिया तुम्हारे कदमो में चाहे इंद्रधनुष अगर कोई उसे लाना तेरे चरणों में छठा रंग है हुकुम तेरा इंद्र धनुष को फलने फूलने दो जब जब मांगे झूले ये ह्रदय इसे झूले में झूलने दो सातवां रंग मेरी विनती है कहो प्रभु तो मैं अर्ज करूँ मैं हाजिरी अपने ह्रदय की हरपल सेवा में दर्ज करूँ.....

सर्वस्व तुम्हे समर्पित है.....

मेरे प्रयासों को प्रेम के पंख देने वाले मेरी सब सफलताएं आपके चरणों में समर्पित है ये तन,ये मन,ये धन मेरा सर्वस्व तुम चरणों में अर्पित है नया जीवन दिया तुमने,नई दिशा दी तुमने मेरे टूटे साहस को फिर से जोड़ा,आशा दी तुमने तेरे प्रेम की चर्चाएं, यदा कदा सर्वदा मेरे हर हृदय कोने में वर्णित है सर्वस्व तुम्हे समर्पित है तुम मुझमे मिलो,मैं लेकर के पिपासा तुममे मिलूं बनकर के दुग्ध पवित्र प्रेम का,दिन रैन तेरे चरणों में निखरुं मैं और तुम जब एक भये,मैं बनकर के हवा तुमसे लिपटूं ये शांति सन्तुष्टि जो पाई मैंने,सब त्व कृपा से अर्जित है सर्वस्व तुम्हे समर्पित है "गुरु चरण"शरण में समर्पण करता आठों पहर हृदय में तुमको धरता हस्त,नयन,हृदय और आंसू का सुंदर सयोंग उस सयोंग से शब्द ये रचित हैं सर्वस्व तुम्हे ही समर्पित है.......