चले आओ...
चले आओ,चले आओ,मुझे बचाने मेरा जीवन फिर से सजाने चले आओ,,,,चले आओ,,, मुझे चाँद तारों के बिच ले चलो ऊँगली मैं थामू तुम्हारी,मुझसे पहले पग तुम धरो मैं हूँ अज्ञानी,अनभिज्ञ,मंदमति चंचल तुम मेरा मार्गदर्शन करो मुझे माया से बचाने ह्रदय से अपनाने चले आओ,,,चले आओ,,,चले आओ मैं पथिक,तुम अंतर्यामी मैं मूढमति,तुम सर्वकला सम्पूर्ण स्वामी भूल के आभार आपका,मैं करता हूँ मनमानी मैं एक तो घोर अज्ञानी,फिर ऊपर से अभिमानी गर्म हवाओ से बचाने,,साथ निभाने चले आओ,,,,चले आओ,,,, मेरा जीवन फिर से सजाने,, चले आओ,,,चले आओ,,,