इन्द्रधनुष

हे अंदर के आकाश मुझे एक इंद्रधनुष बना दो
धनुष बना दो सात रंग का
सात रंग का,सप्तरंग का

पहले रंग में होली-होली
उसमे रौशनी प्यार की
जीवनी मेरे हृदय में
जीवंत तेरे किरदार की

दूजे रंग में रौला-रब्बा
सुनना चाहे हर कोई रब्बा
ना दिखे कोई साज बाज
बजता सुने एक साज सुंदर सा

तीसरे रंग में अमृत फुहारें
गिरती लाल गगन से
बन्द करदी सब कड़िया
अपनी प्यास बूझन दे

चोथे रंग में नई जिंदगी
समझना अगर चाहो तो
सून सतगुरु मार्ग की
शुरू करो प्रेम बन्दगी

पांचवा रंग वचन का
जो सर झुकाकर दिया तुम्हारे कदमो में
चाहे इंद्रधनुष अगर कोई
उसे लाना तेरे चरणों में

छठा रंग है हुकुम तेरा
इंद्र धनुष को फलने फूलने दो
जब जब मांगे झूले ये ह्रदय
इसे झूले में झूलने दो

सातवां रंग मेरी विनती है
कहो प्रभु तो मैं अर्ज करूँ
मैं हाजिरी अपने ह्रदय की
हरपल सेवा में दर्ज करूँ.....

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