मेरे प्रेम की डोर..

आपसे मेरे प्रेम की है डोर कुछ ऐसी प्रभु
मैं प्यास तुम नीर,दोनों एक दूजे के पूरक प्रभु

जब कभी मैं उदास हूँ,तुम मुझे हर्षाते हो
भटके हुए इस पुत्र को,राह तुम दिखलाते हो
मेरी सीरत मे तेरी कीरत,मेरी सूरत में तेरी सूरत प्रभु

हैं भाव सब तुमसे जुड़े,पूर्ण प्रेम के स्वामी हो तुम
हृदय सम्राट,भक्ति राह में अंतर्यामी हो तुम
घट-घट में हैं झांकी तुम्हारी,तुम कुम्हार मैं मूरत प्रभु

"गुरु चरण"कहे शरण में रखना,डोर मत न छोड़ना
ह्रदय के सब तारों को अब प्रेम गगन में जोड़ना
तुम बिन मेरा वजूद नहीं,पल पल मुझे तेरी जरूरत प्रभु

आपसे मेरे प्रेम की है डोर कुछ ऐसी प्रभु
मैं प्यास तुम नीर,दोनों एक दूजे के पूरक प्रभु

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