मेरे अपने सात समन्दर..

रेत में ही घुल जाते हैं मेरे अपने सात समन्दर
आकर मुझमे मिल जाते हैं मेरे सात समन्दर

बनकर पर्वत सी उठती है फिर पत्ते सी गिर जाती है
हवा सी बनकर चलती है,आकर गले लग जाती है
तेज़ वेग से चलती है धारा मेरे अंदर
आकर मुझमे मिल जाते हैं,मेरे साथ समन्दर...।।

खिल खिल कर मुस्काता है,बन जाता मस्त कलन्दर
जीत के दस दरवाजों को बनता सम्राट सिकन्दर
जीती जिभ्या,आँख,कान,जीता दिल देवेन्द्र
आकर मुझमे मिल जाते हैं,मेरे साथ समन्दर...।।

दसो दिशाएं देख ली,सुन लिए सात सुरेन्द्र
ब्रह्माण्ड पर नज़र फिरा दी,देख लिया जब अंदर
ज्योत जगे,शंख बजे,प्रभु सजे,स्वयं हूँ एक मन्दिर
आकर मुझमे मिल जाते हैं,मेरे साथ समन्दर...।।

Comments

Popular posts from this blog

मैं चाहता हूँ…..

कमी सी है ,,,,

जन्मदिन है पावन त्यौहार..💐